बराये मेहरबानी ज्ञान देने के बजाये इबरत हासिल करें

Babar Beig
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हज़रत मूसा (अ.) और उनका ​​लश्कर इक रेगिस्तान मैं फँस गया था …..प्यास से बुरा हाल था …दूर दूर तक पानी नही था।

सबने हाथो को बुलंद करके बरिश की दुआ की..

दुआ खत्म न हुई थी कि जो 1-2 बादल नज़र आ रहे थे, वो भी साफ़ हो गए और और धूप और तेज़ हो गयी।

ये देखकर लश्कर तड़प गया

हज़रत मूसा पर अल्लाह तआ़ाला ने वही नाज़िल की,

‘ऐ मूसा, तुम्हारे लश्कर में इक ऐसा शख्स है जिसने40 साल मेरी नाफ़रमानी की है, उसको लश्कर से अलग करके फ़िर दुआ करो, दुआ क़ुबूल होगी।

हज़रत मूसा अ. ने ये पैग़ाम लश्कर मे पँहुचाया ….. अब सब इंतज़ार कर रहे थे कि वो गुनहगार ख़ुद सामने आये और लश्कर से अलग हो जाऐ ताकि सबकी जान बच सके।

अब उस गुनहगार के माथे पे पसीना आने लगा, आंखो से आंसू जारी हो गये, उसने चुपके से हाथो को बुलंद करके दुआ की:

‘ऐ माबूद, मैने 40 साल तेरी नफ़रमानी की है, अब अपने लश्कर की जान की ख़ातिर बाहर तो आ जाऊँ, लेकिन ज़िल्लत बरदाश्त न हो होगी।

गुनाहों को बख्शने वाला फक़त तू है …. आज मुजे बख्श दे ….

ये दुआ कर ही रहा था कि बारिश शूरू हो गयी

हज़रत मूसा अ ने अल्लाह से सवाल किया,

‘ऐ परवरदिगार, अभी तो गुनहगार अलग भी नहीं हुआ, फिर बारिश क्यूँ?

अल्लाह ने फरमाया:

‘ऐ मूसा, हमने उसकी तौबा कुबूल कर ली है।

‘हज़रत मूसा अ. ने फिर पूछा ए अल्लाह, ये तो बता कि वो कौन था।
अल्लाह ज.शा ने फ़रमाया कि
‘ऐ मूसा, जब वो गुनहहगार था, तब भी चासील साल उसके गुनाह छिपाये अब जब तौबा कर ली तो उसके ऐब कैसे ज़ाहिर कर दूँ।
सुभान अल्लाह!

नोट-बराये मेहरबानी ज्ञान देने के बजाये इबरत हासिल करें।

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