बेशक ईश्वर उन लोगों को पसंद करता है जो बुराई से बचते हैं और अच्छाई को अपनाते हैं

یٰۤاَیُّہَا الَّذِیۡنَ اٰمَنُوا اجۡتَنِبُوۡا کَثِیۡرًا
مِّنَ الظَّنِّ ۫ اِنَّ بَعۡضَ الظَّنِّ اِثۡمٌ وَّ لَا تَجَسَّسُوۡا وَ لَا یَغۡتَبۡ بَّعۡضُکُمۡ بَعۡضًا ؕ اَیُحِبُّ اَحَدُکُمۡ اَنۡ یَّاۡکُلَ لَحۡمَ اَخِیۡہِ مَیۡتًا فَکَرِہۡتُمُوۡہُ ؕ وَ اتَّقُوا اللّٰہَ ؕ اِنَّ اللّٰہَ تَوَّابٌ رَّحِیۡمٌ ﴿۱۲﴾

ऐ ईमान लाने वालो! बहुत से गुमानों से बचो, क्योंकि कतिपय गुमान गुनाह होते हैं। और न टोह में पड़ो और न तुम में से कोई किसी की पीठ पीछे निन्दा करे – क्या तुम में से कोई इसको पसन्द करेगा कि वह मरे हुए भाई का मांस खाए? वह तो तुम्हें अप्रिय होगी ही। – और अल्लाह का डर रखो। निश्चय ही अल्लाह तौबा क़बूल करने वाला, अत्यन्त दयावान है

बेशक ईश्वर उन लोगों को पसंद करता है जो बुराई से बचते हैं और अच्छाई को अपनाते हैं।
(सूरह बक़रह 2:222)

‘दंगल गर्ल’ ज़ायरा वसीम ने जब से बॉलीवुड छोड़ने की बात की है तभी से एक बहस मीडिया और सोशल मीडिया के हलकों में छिड़ गई है।

अलग अलग लोग इसके पक्ष विपक्ष में अपनी रायें रख रहे हैं, लेकिन इस बवाल की आखिर वजह क्या है, जिसपर लोगों की इतनी दिलचस्पी पैदा हो गयी है?

जायरा से पहले भी कई अभिनता और अभिनेत्रियों ने फिल्मी दुनिया को अलविदा कहा है और अपनी जिंदगी को दूसरी दिशा दी है। किसी ने अपने पति पत्नी के आग्रह पर ये फैसला किया, किसी ने अपनी औलाद की परवरिश के लिए इंडस्ट्री छोड़ी और किसी ने महज सुकून हासिल करने के लिये ये कदम उठाया।

लेकिन जायरा का मामला इनसे अलग क्यों है?? सच बात यही है कि जायरा ने अपने इस फैसले की जो बुनयादी वजह बताई है, वो आज के नास्तिकतावादी समाज के सर के ऊपर से जा रही है और उन्हें यही बात खल रही है कि इस लड़की ने दीन-धर्म की खातिर ये चकाचौंध वाली गलियां छोड़ दी हैं।।

जी हाँ, सच यही है कि जायरा ने ये फैसला अपने रब को राजी करने के लिये किया है।

उन्होंने जो पोस्ट अपने फेसबुक पेज पर डाली उसकी मुख्य बातें कुछ इस तरह है::

बॉलीवुड में मुझे बहुत प्यार मिला लेकिन इस रंग रंगीली दुनियां में आने के बाद से मेरा रिश्ता मेरे ईश्वर(अल्लाह) से कमजोर हो गया।

मैंने ऐसे माहौल में काम करना जारी रखा जिसने लगातार मेरे ईमान में दख़लअंदाज़ी की. मेरे धर्म के साथ मेरा रिश्ता ख़तरे में आ गया. मैं नज़रअंदाज़ करके आगे बढ़ती रही और अपने आप को आश्वस्त करती रही कि जो मैं कर रही हूं सही है और इसका मुझ पर फ़र्क़ नहीं पड़ रहा है. मैंने अपने जीवन से सारी बरकतें खो दीं.

क़ुरान के महान और आलौकिक ज्ञान में मुझे शांति और संतोष मिला. वास्तव में दिल को सुकून तब ही मिलता है जब इंसान अपने ख़ालिक़ के बारे में, उसके गुणों, उसकी दया और उसके आदेशों के बारे में जानता है.

मेरा दिल शक़ और ग़लती करने की जिस बीमारी से पीड़ित था उसे मैंने पहचान लिया था. *हमारे दिल पर दो बीमारियां हमला करती हैं. ‘संदेह और ग़लतियां’ और दूसरी ‘हवस और कामनाएं.’

अल्लाह कहता है, “उनके दिलों में एक बीमारी है (संदेह और पाखंड की) जिसे मैंने और ज़्यादा बढ़ा दिया है.” मुझे अहसास हुआ कि इसका इलाज सिर्फ़ अल्लाह की शरण में जाने से ही होगा और *वास्तव में जब मैं रास्ता भटक गई थी तब अल्लाह ही ने मुझे राह दिखाई.

ये उनकी पोस्ट से कुछ अंश हैं जो साफ बता रहे हैं कि इन्होंने ये फैसला अल्लटप नहीं लिया बल्कि लंबे सोच विचार के बाद ये कदम उठाया है।

लेकिन उनके इस फैसले को रूढ़िवादिता और धर्मान्धता का नाम देने वाले ‘आधुनिक मानसिकता’ के लोग उन्हें समझा रहे हैं कि अभी आप बच्ची हो, सही गलत की समझ नहीं है, आगे पूरा जीवन पड़ा है आत्मशुद्धि के लिये..

हमारे समझ में ये नहीं आता कि अब विचारों की स्वछन्दता और नारीवादिता की बातें कहाँ गयी?

आखिर क्योँ एक बालिग लड़की को ईश्वर की शरण में जाने से रोका जा रहा है और उस पर तरह तरह से इल्जाम लगाए जा रहे हैं??

जवाब तो बहुत दिये जा सकते हैं लेकिन संक्षेप में यही जवाब है कि इस वक़्त लोगों की दुश्मनी खुदा से है, ईश्वर से है।

ये मानसिकता चीख चीख कर बता रही है कि अगर कोई महिला अपने अंग प्रदर्शन से बाजार की रौनक बने तो यह तो नारी शक्ति का प्रतीक है, लेकिन वहीं कोई महिला अपने आप को इससे बचाना चाहे तो उसे ‘मजहबी बुखार’ कह दिया जाएगा।

इस मानसकिता से ग्रस्त कोई एक धर्म या एक देश या एक जाति नहीं है, बल्कि पूरी इन्सानियत को इस हवस के शैतान ने बावला कर रखा है। और ये ‘आधुनिकीकरण के कौऐ’ यही चाहते है कि हमें कोई काला न कहे। इन्हें ‘आर्ट’ और ‘एक्टिंग’ के नाम पर होने वाली नग्नता मंजूर है, फिल्मों में आने वाले अश्लील गाने मंजूर है, लेकिन अगर कोई ईश्वर के खातिर इससे बचना चाहे तो इनकी जान सूख जाती है।

मैं तो यही कहूँगा की जिस तरह ‘आधुनिकता के दूत’ एक औरत को नंगे बदन समंदर के किनारे घूमने को उसका अधिकार देते हैं, वहीं ये दोगले लोग एक औरत को पाकदामन क्यों नहीं रहने दे सकते।

सच यही है कि ये औरतों की आजादी सिर्फ इसलिये चाहते हैं ताकि अपनी नजरों की बदकारी का सामान मुहैया कर सकें। ये उसे घर से बाहर इसलिये निकालना चाहते हैं कि खुद उस पर हाथ मार सकें। उसे इसी वजह से कॉलेज स्कूल ऑफिस में बुलाना चाहते हैं कि उसे प्रताड़ित कर सकें।

मेरे इन शब्दों से सज्जन पुरुष चिंतित न हों, ये आपके लिए नहीं है लेकिन अगर ये आपके दिल में चुभ रहें हो तो मैं क्षमा चाहता हूं कि आप ये सज्जनता का ढोंग छोड़ दें।

बाकी आज के वक़्त में जो मुस्लिम या कहूँ कि आस्तिक
लोग हैं उनसे भी अनुरोध है कि अपनी आस्तिकता को जरा टटोलें।

जो लोग शाहरुख सलमान आमिर नवाजुद्दीन इरफान वगैरह के चाहने वाले हैं वो भी जरा गौर करें कि ये फ़िल्म इंडस्ट्री किस तरह आपके दिल से ईमान को खींच लेती है और फितरत को कुचल कर गुमराही पर धकेल देती है।

साथ ही उन भाई बहनों के लिए इसमें बहुत बड़ी नसीहत है जो अपना कैरियर इस इंडस्ट्री या ऐसी ही टीवी या मॉडल या डांस इंडस्ट्री में बनाने की ख्वाहिश रखते हैं ।

हो सकता है कि आप यहाँ बहुत कुछ पा लें लेकिन ये बात यकीनी है कि आप इस रास्ते में बहुत कुछ खो देंगे और इसमें सबसे अहम चीज जो जायरा ने बताई है वो है इतमीनान और सुकून।

और बाकी आप खुद से कितना भी झूठ बोल लें कि इस मयखाने में जाकर आप शराब को हाथ भी न लगायेंगे और अपने ईमान को बचा कर वापस आ जायेंगे।
ये आप की खुशख़्याली है, जो आपको मुबारक हो!!

जायरा ने अपने लेख में जो क़ुरआन की एक आयत बताई है, वो सच में पूरी इंसानियत को होशमंद करने को काफी है।

ऐ ईश्वर के मानने वालों। अगर तुम ईश्वर की नाफरमानी से बचोगे तो तो ईश्वर तुम्हें वो कसौटी देगा जिससे तुम सत्य और असत्य में फर्क कर सकोगे।
ऐ ईमान लानेवालो! यदि तुम अल्लाह का डर रखोगे तो वह तुम्हें एक विशिष्टता प्रदान करेगा और तुमसे तुम्हारी बुराइयाँ दूर करेगा और तुम्हे क्षमा करेगा। अल्लाह बड़ा अनुग्राहक है

﴿سورة الأنفال ٢٩﴾ يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِنْ تَتَّقُوا اللَّهَ يَجْعَلْ لَكُمْ فُرْقَانًا وَيُكَفِّرْ عَنْكُمْ سَيِّئَاتِكُمْ وَيَغْفِرْ لَكُمْ ۗ وَاللَّهُ ذُو الْفَضْلِ الْعَظِيمِ

[क़ुरआन सूरह अनफाल8:29]

अल्लाह जायरा और ऐसे मजबूत ईमान वालों की हिफाजत फरमाये और हमें इनसे सबक लेने की तौफीक अता करे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *