ये क्या दर्शाता है….जब U.N.O में भी आवाज़ उठाई गई

Azhar Shameem
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अपने यहां एक कहावत है, ” जबरा मारे , रोवे भी ना दे ।” बस यही हाल है योगी मोदी राज में। मोदी जी ने चुनाव के बाद जिस तरह से लोकसभा के सेंट्रल हाल में अपने सांसदों को संबोधित करते हुए भाषण दिया था और मुसलमानों के ताल्लुक से कुछ बाते कहीं थीं, उसकी खूब तारीफ हुई थी और मुसलमानो के सामाजिक, धार्मिक नेताओं ने उन्हें प्रशंसा के पत्र भेजे थे। और ऐसा लगा था कि मोदी जी का हृदय परिवर्तन हो रहा है, लेकिन ये किसे मालूम था कि ये भाषणबाज़ी सिर्फ जुमलेबाजी थी। और मोदी जी और उनकी केंद्र व प्रदेश की सरकारें R.S.S के एजेंडे से एक इंच भी हटने को तैयार नही हैं।
यही वजह है कि लोकशाही की जगह हिटलरशाही चल रही है और हमसे लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन का भी अधिकार छीना जा रहा है।

झारखंड के तबरेज़ अंसारी की कथित moblynching या ये कहिए की संघ / भाजपा प्रायोजित और समर्थित भगवा लीनचिंग में हुई बर्बर पिटाई और मौत से देशभर में आक्रोश की लहर वयाप्त हो गयी और सामाजिक, राजनैतिक, धार्मिक संस्थाओं ने विरोध जताना शुरू कर दिया। दिल्ली के जंतर, मंतर समेत देश के कई बड़े शहरों में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन हुए और इसकी गूंज अमेरिका ,इंग्लैंड , तुर्की तक सुनाई दी। U.N.O में भी आवाज़ उठाई गई और इस हत्याकांड की घोर निंदा की गई। भारत सरकार से इस पर रोक लगाने और कातिलों को सज़ा देने की मांग की गई। इसी सिलसिले में जब आगरा, मेरठ और गुजरात के सूरत में विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया और विरोध सभा हुई तो सरकारी साज़िश से संघी लम्पट असामाजिक तत्वों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन में घुसपैठ कर तोड़ , फोड़ की ,जिसके नतीजे में सरकार की मंशा व आदेश पर मुसलमानों को डराने, धमकाने के लिए उल्टा उन पर ही दंगा, फ़साद और अराजकता फैलाने का मुकदमा ठोक दिया गया और आयोजकों पर रासुका लगा दिया गया। अब कुछ लोगों की गिरफ्तारी हो गयी है तो हजारों अज्ञात लोगों की गिरफ्तारी के नाम पर आधी रात को मुस्लिम मुहल्लों में निर्दोषों के घरों में छापे मारे जा रहे हैं, जिसकी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है कि किस तरह जबरन गिरफ्तारी हो रही है और घरों की औरतें चिल्ला रही हैं, बच्चे दहशत के मारे रो रहे हैं।

ये क्या दर्शाता है, यही ना कि सरकार और सिस्टम भगवा प्रायोजित moblynching पर रोक लगाना नही चाहता, उनकी औपचारिक गिरफ्तारी फिर ज़मानत दे कर मामले को रफा, दफा करना चाहता है । ज़मानत मिलने पर केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा नेताओं द्वारा, उन्हें सम्मानित किया जा रहा है, मिठाई खिलाई जा रही है और विरोध जताने पर उल्टा मज़लूम मुसलमानो और दलितों के विरुद्ध कार्रवाई कर, उन्हें डराया, धमकाया जा रहा है और उनका मनोबल तोड़ा जा रहा है। जबकि भगवा आतंकियों को और moblynching के लिए green signal व समर्थन दिया जा रहा है।
अफसोस इस बात का है कि मुदलिम वोटों की दावेदार समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और बसपा भी इस ज़ुल्म को ले कर खामोश हैं और सिर्फ असदुद्दीन ओवैसी और उनकी पार्टी A.I.M.I.M, Bahujan mukti party, S.D.P.I ही आवाज़ उठा रहे हैं।

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