कश्मीर राज्य

मैं कश्मीरी हूं : मैं पूरी दुनिया को दिखाना चाहता हूं कि मेरे बेटे की मौत पेलेट और आंसूगैस से हुई है

कश्मीर: पैलेट गन, आंसू गैस के गोले से युवक की मौत हुई थी

18 साल के असरार अहमद ख़ान की मेडिकल रिपोर्ट कहती है कि उन्हें पेलेट लगे थे और शेल फटने से लगी चोट के कारण उनकी मौत हुई.

यह रिपोर्ट शेर-ए-कश्मीर इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज़ (स्किम्स) की ओर से जारी की गई है. इसमें असरार की मौत का कारण लिखा है- पेलेट और शेल फटने से आए ज़ख़्म और दिमाग़ को गंभीर चोट.

असरार 6 अगस्त 2019 को श्रीनगर के बाहरी इलाक़े शौरा में ज़ख़्मी हुए थे.

सेना के जनरल ऑफ़िसर कमांडिंग केएसजे ढिल्लों ने पुलिस और सेना की एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा था कि असरार को पत्थर लगा था इसी से उनकी मौत हो गई.

मगर मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक़, असरार को 6 अगस्त को स्किम्स में भर्ती किया गया था और तीन सितंबर को रात 8.15 बजे उन्होंने दम तोड़ा.

असरार को स्किम्स के न्यूरोसर्जरी वॉर्ड में भर्ती किया गया था.

क्या कहते हैं परिजन
परिवार के सदस्यों ने बीबीसी को बताया कि असरार को क्रिकेट खेलते समय पेलेट और आंसूगैस का गोला लगने से चोट आई थी.

असरार के पिता फ़िरदौस अहमद ख़ान ने बीबीसी को बताया, “जब सुरक्षा बल वापस लौट रहे थे, उन्होंने आंसूगैस के गोले और पेलेट दागे जिनसे असरार के सिर पर चोट आ गई.”

“इसके बाद हम उसे अस्पताल ले गए. उसे वेंटिलेटर पर रखा गया क्योंकि हालत बहुत ख़राब थी. दो हफ़्तों के बाद उसे सामान्य वॉर्ड में शिफ़्ट किया मगर दो दिन बाद फिर वेंटिलेटर पर रख दिया गया जहां आख़िरकार उसने दम तोड़ दिया.”

फ़िरदौस कहते हैं, “मैं पूरी दुनिया को यह आधिकारिक दस्तावेज़ दिखाना चाहता हूं जो बताता है कि मेरे बेटे की मौत पेलेट और आंसूगैस के शेल की वजह से हुई है.”

जांच की मांग
शोक में डूबे असरार के पिता ने बीबीसी से कहा, “मेरा बेटा पत्थरबाज़ नहीं था. आप उसका रिकॉर्ड देख सकते हैं. हमने सभी दस्तावेज़ दिए हैं. वह बहुत बढ़िया छात्र था. मेट्रिक की परीक्षा में टॉपर रहा था और डॉक्टर बनना चाहता था.”

फ़िरदौस पूछते हैं, “क्या क़सूर था उसका? मेरा बेटा तीस दिनों तक अस्पताल में रहा और सरकार की ओर से कोई इस घटना के बारे में पूछने तक नहीं आया. क्यों सरकार ने कोई जांच कमेटी नहीं बनाई? जांच की जानी चाहिए थी कि मेरा बेटा पत्थरबाज़ था या नहीं.”

फ़िरदौस की आंखों से लगातार आंसू बह रहे थे. वह मांग करते हैं, “हमें सिर्फ़ इंसाफ़ चाहिए. एक जांच कमेटी बननी चाहिए ताकि पता चले कि झूठा कौन है, मैं या वो लोग.”


सेना और क़रीबियों के अलग दावे
सेना के जनरल ऑफ़िसर कमांडिंग ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा था कि 5 अगस्त 2019 को पांच आम नागरिकों की मौत हुई थी और सबकी जान ‘आतंकवादियों और पत्थरबाज़ों ने ली थी.’

5 अगस्त 2019 को भारत ने जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निष्प्रभावी कर दिया था. उसी दिन से घाटी में कई तरह की पाबंदियां लगा दी गई थीं.

अभी भी कई जगहों पर व्यापारिक प्रतिष्ठान और स्कूल बंद हैं और सड़कों पर यातायात के साधन भी कम हैं. मोबाइल और इंटरनेट सेवाओं पर भी रोक लगी हुई है.

असरार के दोस्त मोहम्मद मुक़ीम ने उस दिन को याद किया जब ये घटना हुई थी.

उन्होंने बताया, “शाम सात बजे का समय रहा होगा. सुरक्षा बल वापस अपने कैंपों की ओर लौट रहे थे. तभी हमारे इलाक़े के मेन रोड की तरफ़ से शोर उठा. यहां पर झड़प शुरू हुई तो हर कोई भागने लगा. असरार मेरे साथ बैठा हुआ था. हर कोई सुरक्षित जगह की ओर भागने लगा तो हम भी भागे.”

मुक़ीम बताते हैं, “अचानक हमें आंसूगैस के शेल दाग़े जाने की आवाज़ सुनाई दी. एक शेल असरार से सिर से टकराया, उसी समय पैलेट भी उसके सिर पर लगा. आवाज़ सुनाई दी- मुझे उठाओ, मेरे सिर पर कुछ लगा है. जब मैंने देखा तो असरार ख़ून के छपड़े पर गिरा हुआ था. मैंने अपनी कमीज़ उतारी और उसके सिर पर लपेट दी. इस बीच एक दोस्त उसे अस्पताल ले गया.”

उधर जम्मू कश्मीर पुलिस के एडीजी मुनीर ख़ान ने असरार की मेडिकल रिपोर्ट को लेकर बीबीसी से कहा कि इसमें स्पष्टता नहीं है.

उन्होंने कहा, “मैंने असरार की शुरुआती मेडिकल रिपोर्ट देखी है. यह रिपोर्ट स्पष्ट नहीं है.”

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माजिद जहांगीर
श्रीनगर से, बीबीसी हिंदी के लिए

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अजीत डोभाल ने भारत प्रशासित कश्मीर पर अमरीकी बयान के बाद क्या कहा?

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने शनिवार को भारत प्रशासित कश्मीर में अशांति से जुड़ी ख़बरों और घाटी के मौजूदा हालात पर विस्तृत बयान दिया है.

बीते दिनों बीबीसी समेत कई मीडिया समूहों से भारत प्रशासित कश्मीर में हिंसा और अशांति से भरे माहौल की ख़बरें आती रही हैं.

अमरीकी विदेश मंत्रालय की ओर से भी शुक्रवार को भारत प्रशासित कश्मीर को लेकर बयान जारी किया गया.

अमरीकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मॉर्गन ऑर्टागस ने कहा है, “बड़े पैमाने पर जिस तरह से राजनेताओं और व्यापारियों को हिरासत में रखा गया है, हम इसे लेकर चिंतित हैं.”

उन्होंने कहा, “इसके साथ ही स्थानीय लोगों पर लगी पाबंदियां भी हमारे लिए चिंता का विषय हैं. हम कुछ क्षेत्रों में मोबाइल और इंटरनेट कनेक्शन बंद होने से जुड़ी ख़बरों के प्रति भी चिंतित हैं.”

जेएनयू की पूर्व छात्र संघ नेता शहला राशिद ने भी घाटी में आम लोगों के उत्पीड़न से जुड़े कुछ ट्वीट किए थे.

इसके बाद उनके ख़िलाफ़ राजद्रोह का मामला भी दर्ज किया गया है. सेना लगातार ऐसी ख़बरों का खंडन करती रही है.

लेकिन डोभाल ने शनिवार को कुछ चुनिंदा पत्रकारों से बात करते हुए भारत प्रशासित कश्मीर में स्थिति बिगाड़ने का आरोप पाकिस्तान पर मढ़ा है.

हालांकि, डोभाल ने अपने बयान में अमरीकी विदेश मंत्रालय का कहीं ज़िक्र नहीं किया लेकिन उसमें उन सभी सवालों के जवाब थे जो शुक्रवार को अमरीका की तरफ़ से उठाए गए थे.

डोभाल ने क्या कहा?
मैं पूरी तरह से आश्वस्त हूं कि कश्मीर की बहुसंख्यक आबादी अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के पक्ष में है.
कश्मीरी अवाम अनुच्छेद 370 पर भारत सरकार के फ़ैसले के बाद बेहतर अवसर, बेहतर भविष्य और युवाओं के लिए ज़्यादा नौकरियों की संभावनाएं देख रही है.
सिर्फ कुछ लोग इसके विरोध में हैं. लोगों को ऐसा लगता है कि ये आम लोगों की आवाज़ है. ये पूरी तरह सच नहीं है.
कश्मीर में सेना की ओर से उत्पीड़न का सवाल ही नहीं उठता है. शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बल तैनात हैं. भारतीय सेना वहां पर सिर्फ आंतकवाद से लड़ने के लिए मौजूद है.

जम्मू-कश्मीर के किसी भी नेता के ख़िलाफ़ कोई भी चार्ज या राजद्रोह का मामला नहीं लगाया गया है. वे एहितायतन हिरासत में लिया गए हैं. जब तक लोकतंत्र चलने के लिए सही माहौल न बन जाए, तब तक वे हिरासत में रहेंगे. मुझे ऐसा लगता है कि जल्द ही ऐसी स्थितियां पैदा होंगी.
कुछ लोगों को एहतियात के तौर पर हिरासत में लिया गया है. अगर जनसभाएं होतीं तो आतंकवादी इसका फायदा उठा सकते थे और क़ानून व्यवस्था को संभालने में दिक्कत होती.
सभी नेताओं को क़ानून के दायरे में रहकर हिरासत में लिया गया है. वे अपनी हिरासत को कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं.

सीमा के पार 20 किलोमीटर दूर पाकिस्तानी संचार टॉवर हैं. पाकिस्तानी वहां से संदेश भेज रहे हैं. हमने कुछ इंटरसेप्ट सुने हैं. वो कह रहे थे कि इतने सेब के ट्रक कैसे चल रहे हैं. क्या आप उन्हें भी रोक नहीं सकते. क्या अब हम चूड़ियां भेज दें?”
मुझे लगता है कि कश्मीर में स्थितियां उम्मीद से जल्दी बेहतर हो रही हैं. सिर्फ छह अगस्त को एक मामला हुआ है. इसमें एक लड़के की मौत हुई है. लेकिन उसकी मौत गोली लगने से नहीं हुई.
हम चाहते हैं कि सभी पाबंदियां हट जाएं. लेकिन ये इस बात पर निर्भर करता है कि पाकिस्तान कैसे व्यवहार करता है. यहां पर क्रिया की प्रतिक्रिया वाली स्थिति कायम है.
अगर पाकिस्तान अपना बर्ताव ठीक कर ले. आतंकी डराना बंद करें और घुसपैठ न करें. अगर पाकिस्तान अपने टॉवरों से अपने लड़ाकों को संदेश भेजना बंद करे तो हम पाबंदियां हटा सकते हैं.

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कश्मीरी पंडितों का छलका दर्द

बडगाम, नवीन नवाज। तंग गलियों के सन्नाटे से गुजरते हुए किसी को आभास नहीं होता कि यहां जिंदगी अब भी खौफ के साये में कैद है। 370 से आजादी का जश्न पूरे देश में मन रहा है लेकिन अपने घरों से उजड़कर इस कॉलोनी में कैद हुए कुछ कश्मीरी पंडित अब भी अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं। कॉलोनी के गेट पर लगा बैरियर और सादे कपड़ों में तैनात सुरक्षाबलों की मौजूदगी अहसास करा देती है कि इनके हालात बदलने के लिए अभी काफी कुछ करना होगा।

कॉलोनी में अजब का सन्नाटा है। यहां रह रहे परिवार 5 अगस्त को आतंकवाद और अलगाववाद पर हुई सर्जिकल स्ट्राइक की खुशी चाहकर भी नहीं मना सकते। बडगाम के कई क्षेत्रों में रह रहे कई कश्मीरी पंडितों ने 1990 के दशक में भी घाटी से पलायन नहीं किया था, लेकिन बाद में हुए नरसंहार के बाद वह अपने घरों से उजड़ गए और पुनर्वास के नाम पर बनाई गई कॉलोनी में बसा दिया गया। उनके साथ कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के लिए घोषित रोजगार पैकेज के तहत नौकरियां पाने वालों को भी आश्रय दिया गया। लेकिन एक पखवाड़े में यहां रहने वाले 294 परिवारों में से भी 243 जम्मू चले गए हैं। शेष परिवारों के अधिकांश सदस्य भी जम्मू, उधमपुर या दिल्ली में हैं।

कॉलोनी में नहीं दिखी चहल-पहल
पूरी कालोनी में कोई चहल-पहल नहीं हैं। सिर्फ चार रिटायर्ड बुजुर्ग ही अखरोट के पेड़ के नीचे ताश खेल रहे हैं। पहले हालात के बारे में बातचीत करने को कोई राजी नहीं हुआ। जोर देने पर एक ने कहा कि हमसे क्या पूछते हो, बाहर जाकर बात करो? तभी दो युवक पिंटू और उपेंद्र भी वहां पहुंच गए। पेशे से अध्यापक उपेंद्र ने कहा कि हमारी खुशी-गम के बारे में मत पूछो। हम तो पहले ही उजड़ चुके हैं।

राज्य की बेटियों को होगा फायदा
राजस्व विभाग में पटवारी के पद से रिटायर्ड भूषण कौल ने कहा कि हमने कभी कश्मीर नहीं छोड़ा। लेकिन हमारा बचा भी क्या है। खैर, राज्य की बेटियों के साथ जो यहां राजनीतिक, आíथक और सामाजिक भेदभाव सरकारी तौर पर होता था, अब वह खत्म हो जाएगा।

वह परेशान हैं जिनका सियासी वर्चस्व समाप्त हो रहा है
लेखक मनोहर लालगामी ने कहा कि पहचान का डर दिखाने वालों को बता दें कि हमारी पहचान और कश्मीरियत 1990 के दशक में मिटाने की साजिश रची गई थी। हमारा अब क्या छिनेगा। निश्चित तौर पर अब वह परेशान होंगे, जिनका सामाजिक और सियासी वर्चस्व समाप्त हो रहा है। आज जो पहचान खत्म होने की बात करते हैं वे किस पहचान की बात करते हैं, यह भी तो बताएं।

अब भी 3500 कश्मीरी पंडित हैं वादी में
आतंकियों की धमकियों के बावजूद करीब 3500 कश्मीरी पंडित आज तक वादी में डटे हैं। इन कश्मीरी पंडितों के एक संगठन कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति के अध्यक्ष संजय टिक्कू ने कहा कि हमारे लिए हालात ज्यादा अनुकूल नहीं हैं। इसे टीवी चैनलों द्वारा किसी की जीत घोषित करने से यहां तनाव बढ़ ही रहा है। इसलिए बरसों से रह रहे हमारे समुदाय के कई लोग अब अपने भविष्य और सुरक्षा को लेकर आशंकित हैं।

अनंतनाग से सात परिवारों का हुआ पलायन
संजय टिक्कू ने बताया कि अनंतनाग के सोमरन में कश्मीरी पंडितों के सात परिवार पलायन कर चुके हैं। इसके अलावा 5 अगस्त को गांदरबल में पुलिस ने लार, वुसन और मनिगाम से भी कश्मीरी पंडितों के पांच परिवारों को सुरक्षित जगह पर पहुंचाया है।

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सिवन साहब! मैं कश्मीरी हूं, संपर्क टूटने का दर्द जानता हूं

फैजान बुखारी

प्रिय डॉ. सिवन

सबसे पहले तो मैं आपको और आपकी टीम को इस जबरदस्त उपब्धि की बधाई. मिशन चंद्रयान-2 को कामयाब बनाने के लिए आपने कड़ी मेहनत की. लेकिन दुर्भाग्य से चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम का ग्राउंड कंट्रोल रूम से संपर्क टूट गया.

मुझे पता है कि आप अपने देश को शोहरत की बुलंदी पर पहुंचाना चाहते थे. कौन नहीं चाहेगा कि वह अपने देश के लिए कुछ करे. मैं यह भी जानता हूं कि जब आप किसी के इतने करीब हों और उससे संपर्क टूट जाए तो यह कितना तकलीफदेह होता है. मैंने भी एक महीने पहले अपने चांद से अपना संपर्क खो दिया. मेरा चांद यानी मेरी मां. वह जम्मू-कश्मीर के बडगाम में रहती हैं. कई हफ्ते हो गई मैं उनसे बात नहीं कर सका हूं.

आप एक बहुत बड़े वैज्ञानिक हैं और आपको पता है कि हालात कैसे संभाले जाते हैं. फिर भी आप पीएम के सामने रो पड़े. जब कोई आपके बहुत करीब हो और आप उससे बात न कर पाएं तो दिल दुखता है. लेकिन मैं समझता हूं आप काफी भाग्यशाली हैं. पीएम ने आपको गले लगाया. आपको थपकिया दीं और दिलासा दिया कि सब कुछ ठीक हो जाएगा. लेकिन मुझे देखिए. मैं कितना बदकिस्मत हूं. एक महीने से ज्यादा हो गया. मेरा अपने परिवार से कोई संपर्क नहीं हो पाया. फिर भी कोई मुझे दिलासा देना, भरोसा दिलाने नहीं आया.

हमारे माननीय पीएम ने हम जैसे लोगों के बारे में एक शब्द भी नहीं कहा. उन लोगों के लिए जिनका अपने परिवारों से संपर्क कट चुका है. सर, कहीं न कहीं हमारा और आपका हाल एक ही जैसा है. आप कह रहे थे कि हम लैंडर विक्रम से कम्यूनिकेशन स्थापित करने के लिए पूरी कोशिश कर रहे हैं. और मैं पिछले एक महीने से अपने परिवार से संपर्क साधने की जी-तोड़ कोशिश में लगा हूं.
fbtw
मुझे यह भी लग रहा है कि लैंडर से विक्रम का आपका संपर्क हो जाएगा. लेकिन अपने परिवार से संपर्क की मेरी संभावना कम लग रही है. सर, सबसे ज्यादा तकलीफ किस चीज से होती है यह मालूम है आपको? मुझे मालूम है. यह दर्द तब होता है जब आपके हमवतन ही आपसे मुंह मोड़ लेते हैं. आपके दर्द से उन्हें कोई सहानुभूति नहीं होती. वो आपको दिलासा नहीं देते और न सहानुभूति दिखाते हैं.

सर, मैं फिर कहना चाहता हूं आप काफी लकी हैं. जब आपने लैंडर से कनेक्शन टूटने की बात कही तो सोशल मीडिया पर भरोसा देने और उत्साह बढ़ाने वाले पोस्ट की बाढ़ आ गई. लेकिन मैं यहां अकेले बैठा हूं. आपको चिट्ठी लिख रहा हूं.

आपका

फैजान बुखारी

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मीडिया की एकतरफा खबरों से गुस्साए कश्मीरी पंडितों ने वाशिंगटन पोस्ट के खिलाफ किया प्रदर्शन

अमेरिका में कश्मीरी पंडितों ने हाल ही में जम्मू-कश्मीर में हुए घटनाक्रमों की एकतरफा खबरें प्रकाशित करने के खिलाफ ‘द वाशिंगटन पोस्ट’ के कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया।

इस पर समाचार पत्र ने कश्मीर पर अपने कवरेज को निष्पक्ष, सटीक और व्यापक बताते हुए इसका बचाव किया है। यह प्रदर्शन ग्लोबल कश्मीरी पंडित डायस्पोरा ने किया।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि भारत सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को समाप्त करने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के बाद यह प्रतिष्ठित अमेरिकी दैनिक अखबार एकतरफा और भेदभावपूर्ण खबरें दे रहा है।

डायस्पोरा ने वाशिंगटन पोस्ट को दिए एक ज्ञापन में कहा, ‘आपकी खबरों में जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के साथ ही अनुच्छेद 35ए से हुई कानूनी अराजकता का जिक्र नहीं है।’ साथ ही अमेरिका के विभिन्न हिस्सों से वाशिंगटन में एकत्रित हुए कश्मीरी पंडितों ने यह ‘साहसी और ऐतिहासिक कदम’ उठाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में नारे लगाए।

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श्रीनगर में मुहर्रम के जुलूस पर कर्फ्यू के दौरान घंटाघर लाल चौक इलाके में सन्नाटा पसरा रहा। बता दें कि मुहर्रम के जुलूस को रोकने के लिए अधिकारियों ने श्रीनगर शहर के कई इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया है।

कश्मीर घाटी में इस वर्ष भी मुहर्रम पर कोई जुलूस नहीं निकलेगा। सभी कार्यक्रम संबंधित इमामबाड़ों में ही होंगे। जम्मू और कश्मीर प्रशासन ने शुक्रवार को यह जानकारी दी थी।

सरकार के एक शीर्ष अधिकारी के अनुसार, इस बारे में प्रशासन पिछले वर्षों की परंपरा का पालन करेगा और किसी भी तरह के जुलूस की अनुमति नहीं देगा।

ऐसी आशंका है कि इस मौके का इस्तेमाल असामाजिक तत्व सुरक्षाबलों पर हमले के लिए कर सकते हैं।

अधिकारी ने कहा कि शिया समुदाय के लोगों से 10 दिन की इस अवधि के दौरान सभी धार्मिक कार्यक्रम स्थानीय इमामबाड़ों में करने के लिए कहा गया है।

 

मालूम हो कि एक सितंबर से शुरू हुए महर्रम को लेकर शिया मुसलमान इन 10 दिनों के दौरान शोक मनाता है।

कश्मीर में 1990 में जबसे आतंकवाद का दौर शुरू हुआ है तबसे मुहर्रम के जुलूसों को निकालने की अनुमति नहीं है।

प्रशासन ने एक संकेत के रूप में प्रशासन ने पूर्व मंत्री इमरान अंसारी सहित कुछ शिया नेताओं को सेंटौर होटल के निरोध केंद्र से उनके घरों में स्थानांतरित कर दिया है।

वहीं जम्मू शहर में शुक्रवार को मुहर्रम पर मातमी जुलूस निकाला गया। अंजुमन-ए-इमामिया जम्मू के बैनर तले स्व. सईद मजहर अली शाह के आवास से निकाला गया जुलूस इमाम बारगाह न्यू प्लॉट पहुंचा।

इसके बाद अंबफला रोड, उस्ताद मोहल्ला, पंजतीर्थी, जैन बाजार से होता हुआ इमाम बारगाह पीर मिट्ठा में संपन्न हुआ।

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Jammu Kashmir TV

Freedom March to LOC

10s of Thousands of pro independence political activists in Pakistani administrated Kashmir demanding demilitarization from both sides, reunification of Jammu Kashmir and a peaceful settlement of Kashmir conflict acceptable to the principle party i.e. people of Jammu Kashmir State under Indian-Pakistani occupation. Today instead of their voices being heard, governments are using excessive force by teargasing, batten charging and creating chaos at Hajira Town of district Poonch. Similar ill treatment is being reported from other towns.
We demand that let the people raise their voices peacefully and let them exercise their will through ballot before they are pushed to the wall and are forced to use bullet.
#Solidarity#
#Kashmir
#Freedomofexpression

List of arrested marchers in Rawalakot, Pakistan Administrated Kashmir during the Freedom March to LOC

Satyendra PS
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महज पांच साल के नरेंद्र मोदी के शासनकाल में अमेरिका यह मानने लगा है कि अब भारत को चूसा जा चुका है और अब फेंक देने लायक है.

वही भारत, जिसे बुश के दूसरे कार्यकाल में चीन के समानांतर अर्थव्यवस्था माना जाने लगा था… अमेरिका हर हाल में भारत से चिपके रहना चाहता था.

मलिकार यह सब क्या लिख रहे हैं 🙄। पढ़िए. पढ़े जाने लायक चीज है।

हालांकि मलिकार यह भी मान रहे हैं कि सरकार इस डाल से उस डाल कूदी तो बहुत है. मेहनत में कोई कमी नहीं है.

No black banners, big processions : A muted Muharram in Kashmir

It is a muted Muharram in Kashmir, particularly in Srinagar city, where even the customary processions were not allowed this year.

There are no black banners at the city centre and no big processions — this year, for the first time in decades, there are little signs of Muharram in Srinagar.

It is a muted Muharram in Kashmir, particularly in Srinagar city, where even the customary processions were not allowed this year.

“This is for the first time that there is no semblance of Muharram in the Valley,” said a resident of Alamgari Bazar, a neighbourhood in Srinagar. “In the past, the government wouldn’t allow a few big processions taken out from particular places of Srinagar. But this time, the ban is strict and even the smaller processions which were allowed in past are not being allowed.”

On Sunday, the Jammu and Kashmir administration reimposed the restrictions on civilian movement in several parts of the city, including the city centre Lal Chowk. The restrictions were imposed to prevent Muharram processions from being taken out from the Shaheed Gunj locality.

While the Shaheed Gunj procession was not allowed in the past as well, the police and paramilitary forces on Saturday swooped on the mourning procession taken out at Hassanabad in the city. In the past, the Hassanabad procession would be allowed. Several people taking part in the procession and at least five journalists were injured in the action by police and paramilitary forces.

The Shia clerics say that such is the clampdown in Valley that they have to be very careful while addressing Muharram gatherings.

“Muharram is all about Karbala and Karbala is all about fight against oppression,” said a cleric from Zadibal neighbourhood of Srinagar. “In our usual Muharram sermons, we talk about the oppression and eulogise the fight against it. Oppression inadvertently comes into our sermons. But this time, there is so much pressure that we are very careful while talking about it. Some of our clerics, who were vocal in their sermons, have already been picked up.”

The Jammu and Kashmir administration is planning to continue restrictions in parts of Srinagar for Monday and Tuesday, the 9th and 10th day of the month of Muharram when major processions are taken out in different parts of the Valley.

While a few black banners and flags have appeared in some other parts of the Valley, the pictures of Hezbollah leader Hassan Nasrallah and the yellow flags of his militant organisation are missing this time. People from the Shia community have also stayed away from hoisting Iranian flags at most places of the Valley this time.

David Vance
@DVATW
Tomorrow in Parliament, Labour MP
@HollyLynch5
will present a petition regarding “Human Rights in Kashmir”. Holly has won her 2 elections in Halifax with an average 6% majority, and Halifax has a 10% Pakistani population. Holly must follow the Pakistan ISI-Jihad agenda, or else!

#Kashmir has become an international issue, anyone admits it or not!

Switzerland has put Kashmir on agenda during President Kovind’s visit
Kashmir is on the agenda for Switzerland during President Kovind’s visit to the country. This comes days after the European Union Committee on Foreign Affairs discussed Kashmir in a closed door meeting.

Geeta Mohan

September 6, 2019

ashmir is on the agenda of talks between Switzerland and India during President Ram Nath Kovind’s state visit to Bern, said the official press release of the Swiss government.

President Kovind will be on a three-country tour next week where he will visit Iceland, Switzerland and Slovenia from September 9 and will be in Bern on September 13.

In a statement, the Federal Department of Foreign Affairs (FDFA) in Switzerland said the “situation in Kashmir” will be discussed among other things.

“Discussions will include the envisaged free trade agreement that the European Free Trade Association (EFTA) and India have been negotiating since 2008. Cooperation between Switzerland and India on energy and transport will also be addressed. Other items on the agenda include climate change, global security issues and human rights, the situation in Kashmir and India’s regional situation”, read the FDFA statement.

This comes days after the European Union Committee on Foreign Affairs discussed Kashmir in a closed door meeting. The in-camera briefing of the European members in Brussels was held on September 3 with Gunna Wiegnad, Managing Director for Asia and Pacific, European External Action Service (EEAS).

India maintains that changes in Article 370 is an internal matter of India and the dispute of Kashmir is bilateral to India and Pakistan.

Swiss President Ueli Maurer will receive President Ram Nath Kovind in Bern with military honours on September 13.

The official talks at the Bernerhof hotel in the afternoon will be attended by President Maurer, Vice President Simonetta Sommaruga and Federal Councillors Guy Parmelin und Ignazio Cassis.

The main areas in which there is potential for strengthening bilateral cooperation include economic affairs and finance, as well as science, research and education.

Highlighting the importance that Switzerland attaches to relations with India, the statement read, “Since 2005, Switzerland and India have maintained a regular political dialogue. India is Switzerland’s third largest trade partner in Asia and its most important trade partner in South Asia.”

“The two countries also regularly exchange views within the framework of a joint economic commission that includes the private sector. In addition to political and economic exchanges, Switzerland and India also foster cooperation in the fields of science, education and culture,” the statement further read.

President Maurer and President Ram Nath Kovind will attend a high-level Indo-Swiss economic forum in Bern. A state dinner will be held in the evening.

The visit by President Kovind continues the series of regular contacts at the highest level, as this is the third state visit by an Indian head of state to Switzerland in the past fifteen years. In 2017, Doris Leuthard paid a presidential visit to India when he held the office.

According to the press release, “In 2018, Switzerland and India celebrated the 70th anniversary of their treaty of friendship. This treaty, concluded directly after Switzerland’s recognition of Indian independence in 1947, allowed the two countries to develop solid bilateral relations.”

Joy
@Joydas
Doval says how long communication blockade in Kashmir will last depends on Pakistan’s behaviour. This is a “Super Power” with “strong” PM who will punish own citizens because he is incapable of preventing what neighbouring country might do

Ibn Sina
@Ibne_Sena
From the beginning Jammu, Kashmir and Ladakh are the part of India. All these three regions were the single State before the Abrogation of Article 370. Why there is always problem only in kashmir when Jammu and Ladakh were the one part.

FYI- Muslims are also in Jammu & Ladakh.

Preet Kaur | ਪਰੀਤ
@Harleen___2

Human Rights violations in IOJ&K from January 1989 till January 2019

Total Killing. 95,283
Custodial Killings. 7,120
Civilian arrested. 145,597
Structures destroyed. 22,898
Children orphaned. 107,756
Women gang raped. 11,111

Source: Kashmir Media Service

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