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video : हिज़्बुल्लाह के पास इस्राईल के अत्याधुनिक ड्रोन विमानों को मार गिराने वाले मिसाइल मौजूद हैं : रिपोर्ट

क्या इस्राईल के मीरकावा टैंकों की तरह ड्रोन विमानों का हौवा भी हिज़्बुल्लाह ही समाप्त करेगा? दक्षिणी बैरूत में गिरने वाले दोनों ड्रोन विमानों की ख़ुफ़िया सच्चाई क्या है? अरब जगत के प्रख्यात टीकाकार अब्दुल बारी अतवान का जायज़ा

हिज़्बुल्लाह और अवैध इस्राईली शासन के बीच शायद अगला टकराव लेबनान की वायु सीमा में होगा। इससे पहले अधिकतर टकराव अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन के इलाक़ों में होते रहे हैं। शायद इस्राईल ने दक्षिणी बैरूत के ज़ाहिया इलाक़े में अपने दो ड्रोन विमान भेजकर एक नई लड़ाई की शुरुआत कर दी है।

नई जानकारियों से यह पता चला है कि इस्राईली प्रधानमंत्री नेतनयाहू ने संसद के चुनाव से तीन सप्ताह पहले यह मोर्चा खोला है जिससे कई महत्वपूर्ण बिंदुओं का इशारा मिलता है।

पहली चीज़ तो यह है कि बैरूत के दक्षिणी ज़ाहिया इलाक़े में पहुंचने वाले दोनों ड्रोन विमान लेबनान के भीतर से ही उड़े थे, बल्कि यह कहना चाहिए कि ज़ाहिया के क़रीब उत्तरी भाग से उड़े थे और इसमें किसी इस्राईली एजेंट की महत्वपूर्ण भूमिका थी जबकि दोनों विमानों का आप्रेटिंग रूम तेल अबीब में थी और वह वहीं से कंट्रोल किए जा रहे थे। अलबत्ता इसका यह मतलब नहीं है कि जिस एजेंट ने लेबनान के भीतर यह दोनों ड्रोन पहुंचाए उसे इनकी असली गंतव्य के बारे में जानकारी भी रही हो।

दूसरी बात यह है कि उच्च लेबनानी नेतृत्व जिसे यह जानकारियां मिली हैं और जिसके पास ठोस साक्ष्य मौजूद हैं इस मामले में लिप्त सभी पक्षों के बारे में व्यापक जांच का फ़ैसला कर चुका है ताकि देश के भीतर किसी प्रकार का मतभेद और टकराव न शुरू हो जाए।

तीसरी बात यह है कि ज़ाहिया के इलाक़े में जो घटना हुई उसमें और इराक़ में स्वयंसेवी बल हश्दुश्शअबी के शस्त्रागार पर जो ड्रोन हमला हुआ उसमें स्पष्ट समानता थी कि दोनों स्थानों पर ड्रोन विमान पहुंचे उनमें धमाका हुआ और इससे शस्त्रागार को निशाना बनाया गया।

चौथी बात यह है कि पहला ड्रोन विमान जो दक्षिणी ज़ाहिया के इलाक़े में भेजा गया था वह रात के समय बिजली के तारों में उलझ कर गिर गया। ड्रोन आपरेट करने वालों को बिजली के तारों की इस स्थिति का पहले से अंदाज़ा नहीं था। ड्रोन गिर जाने से इस्राईल की दुष्ट नीयत का पर्दा फ़ाश हो गया। दूसरा ड्रोन शस्त्रागार को निशाना बनाने के लिए भेजा गया था मगर वह अपना मिशन पूरा नहीं कर पाया। इसके कई कारण हैं लेकिन लेबनानी सूत्रों ने इस बारे में कुछ भी बताने से इंकार किया है।

हिज़्बुल्लाह की ओर इस्राईल को मुंहतोड़ जवाब दिए जाने के बाद लेबनान के भीतर टकराव शायद समाप्त या स्थागित हो गया है क्योंकि हिज़्बुल्लाह की जवाबी कार्यवाही से इस्राईल के मिसाइल डिफ़ेन्स सिस्टम की कमज़ोरी जगज़ाहिर हो गई और तत्काल बहुत सारे सामरिक समीकरण बदल गए। इस्राईल द्वारा निर्धारित रेड लाइनों को हिज़्बुल्लाह ने बहुत आराम से क्रास कर लिया।

सबसे बड़ी बात यह है कि हिज़्बुल्लाह अपने जवाबी हमले की जो वीडियो जारी की है उसमें साफ़ देखा जा सकता है कि कितनी बारीकी से इस्राईल की गतिविधियों पर हिज़्बुल्लाह की नज़र है, हिज़्बुल्लाह के जवान कितनी सफ़ाई से अपने लक्ष्य का निर्धारण करते हैं और पूरी सफलता से उसे ध्वस्त कर देते हैं। इस्राईल की सारी तैयारियां धरी की धरी रह जाती हैं।

सैयद हसन नसरुल्लाह बार बार कह चुके हैं कि हिज़्बुल्लाह के पास ज़रूरी मात्रा में सटीक मिसाइल मौजूद हैं मगर इस्राईली सूत्र इसके बावजूद बार बार यह लेबनान के अलग अलग स्थानों के बारे में ख़ुफ़िया जानकारी लीक करते हैं कि वहां हिज़्बुल्लाह का मिसाइल बनाने का कारख़ाना है। इससे अंदाज़ा होता है कि इस्राईल लेबनान के भीतर हमले करने के बहाने की खोज में है।

सैयद हसन नसरुल्लाह ने जब यह एलान किया कि नेतनयाहू और उनकी हेकड़ी पर सबसे बड़ा वार यह होगा कि जो भी ड्रोन विमान लेबनान की वायु सीमा का उल्लंघन करेगा उसे मार गिराया जाएगा तो इसका मतलब यह है कि हिज़्बुल्लाह के पास इस मिशन को अंजाम देने वाला रक्षा सिस्टम मौजूद है क्योंकि यह इंसान कभी झूठ नहीं बोलता और न ही अतिशयोक्ति करता है, हमेशा ठोस साक्ष्यों और जानकारियों के आधार पर ही बोलता है।

कुछ जानकारियां मिली हैं जिनसे यह पता चलता है कि हिज़्बुल्लाह के पास इस्राईल के अत्याधुनिक ड्रोन विमानों को भी मार गिराने वाले सटीक मिसाइल मौजूद हैं। सूत्र तो यहां तक कह रहे हैं कि जिस ईरानी मिसाइल ने हुरमुज़ स्ट्रेट के क़रीब वायु सीमा का उल्लंघन करने वाले अमरीकी ड्रोन विमान ग्लोबल हाक को मार गिराया था वह शायद हिज़्बुल्लाह के पास पहुंच चुका है।

इस मिसाइल का विषय इसलिए बहुत महत्वपूर्ण है कि इस्राईल आधुनिक ड्रोन विमानों के उत्पादन में बहुत मशहूर है और इस टेक्नालोजी से इस्राईली ख़ज़ाने को तुर्की, भारत तथा खुद अमरीकी सेना से काफ़ी पैसे मिल जाते हैं।

हिज़्बुल्लाह की मिसाइल ताक़त ने वर्ष 2006 के युद्ध में इस्राईल के मीरकावा टैंकों ध्वस्त कर करके इन टैंकों के बारे में इस्राईल द्वारा खड़ा किया गया हौवा भी ध्वस्त कर दिया था अतः हमें कोई हैरत नहीं होगी अगर आने वाले दिनों और हफ़्तों में हम हिज़्बुल्लाह के आधुनिक मिसाइलों को उड़ते हुए देखें जो इस्राईल के ड्रोन विमानों का हौवा भी ध्वस्त कर दें।

बड़ी लड़ाइयां इसी प्रकार की छोटी छोटी घटनाओं से शुरू होती हैं।

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