साहित्य

हत्या…बलात्कार…दंगे…कुछ भी…जी भर कर खेलो ख़ूनी खेल

Arun Maheshwari ============= “हम अगर कहीं जाएंगे तो हमारे कंधे पर उन दबी हुई आवाजों की शक्ति होगी जिनको बचाने की बात हम सड़कों पर करते हैं। अगर व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा होगी तो भगत सिंह जैसे शहीद होने की महत्वाकांक्षा होगी, न कि जेएनयू से इलेक्शन में गांठ जोड़कर चुनाव जीतने और हारने की महत्वाकांक्षा होगी […]

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तब की यह तस्वीर, तब हम दाढ़ी रखते थे

Ish Madhu Talwar ========== #फिर_याद_आया_वैर_! ———————————————————— वैर (भरतपुर) की हवेली में हुई एक मुलाकात रांगेय राघव के बड़े भाई टीएनके आचार्य जी से। तस्वीर में मेरे पास बैठे हैं लेखक, रंगकर्मी दोस्त अशोक राही। यह 1980 की बात है, जब वैर में राजस्थान साहित्य अकादमी ने नवांकुर लेखक सम्मेलन आयोजित किया था। इससे पहले हम […]

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औरत और मर्द

Shikha Singh – ============= · औरत और मर्द हर घर में होती है एक औरत औरतों की कहीं कमी नहीं हर घर में भी होते है मर्द मर्दो की भी कमी नहीं फिर क्यों लिखे जाते है दर्द जब जरुरी है औरत और मर्द क्यों उतारी जाती है औरत की इज़्ज़त क्यों किया जाता है […]

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#रंडी…….वो तुम नीच नामर्द ही होते हो, जो…!~!

vaia : Shikha Singh =========== #रंडी ― कुछ साल पहले की बात है मारिया शारापोवा को “रंडी” सिर्फ़ इसलिए कहा गया क्योंकि वह सचिन तेंदुलकर को नहीं जानती थीं! ― सोना महापात्रा “रंडी” हो गयीं क्योंकि वो सलमान ख़ान की रिहाई सही नहीं मानती थीं! ― सानिया मिर्ज़ा से लेकर करीना कपूर तक हर वो […]

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वो जो बुढ़िया माँ बिलख रही थी…

वो जो बुढ़िया माँ बिलख रही थी … कहीं हिंदी … सरला माहेश्वरी : बूढ़ी जर्जर काया बच्चों की तरह बिलख रही थी धुँधलाई बेचैन आँखें कुछ खोज रही थी रह-रह कर पुकार रही थी दो नाम अपने बेटों के नाम ! वे बेटे ! जिनके लिये माँगी थी मन्नतें काली की थी अनगिनत रातें […]

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गणपति विसर्जन में छुपे हुए अर्थ

डाॅ.मुरलीधर चाँदनीवाला _________________________ परम्परा और संस्कृति से जुड़े हुए कई प्रश्न ऐसे होते हैं ,जिनका कोई भी उत्तर पूर्ण नहीं होता।अब यही प्रश्न लीजिए, गणपति विसर्जन क्यों होता है ? कई उत्तर हो सकते हैं पौराणिक दृष्टि से भी और आध्या- त्मिक दृष्टि से भी । गणेश चतुर्थी के दिन जो लोग बड़े उत्साह और […]

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किसी पद पर होने के बाद रोना, किसी ब्रेकिंग न्यूज से कम नहीं है!

Pratima Jaiswal ============ मेरे जीवन में ऐसे कई पुरुष दोस्त रहे, जिनसे कई विषयों पर वैचारिक मतभेद रहे। कभी-कभी भेद इतना बढ़ जाता कि बहस तक हो जाती। इनमें से कुछ दोस्त ऐसे थे, जिन्होंने जीवन के उदासीन और बोझिल दिनों में मुझे याद किया। इनमें से कुछ दोस्त ऐसे थे, जो दुनिया की नजरों […]

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सूर फूंका गया था या नहीं…!!!

Anwar Suhail ============== सूर फूंका गया था या नहीं कोई नहीं जानता लेकिन जलावतनी की सज़ा काटते असंख्य इंसान हो गये इकट्ठा वहां हां वह हश्र का मैदान तो न था लेकिन वह क़यामत भी तो न थी। कीड़े-मकोड़ों की तरह बजबजाते इंसानी ढांचों की भीड़ नफ्सा-नफ्सी का आलम देह से देह छिल जाए ऐसी […]

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एक बड़े होते बच्चें की मम्मा

Madhu ============== 10th क्लास पास करने के बाद मन रुई सा हल्का हो गया था । जीवन में अब मैथ्स नाम के राक्षस का आतंक न होगा । मैथ्स पीरियड के 40 मिनिट जैसे एक जुग से लम्बे । पीरियड खत्म ही नही होता लगता था । अचम्भा होता कि मैथ्स टीचर इतनी देर से […]

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यह जापान में घटी, एक सच्ची घटना है

Siya Sachdev ============ काश हम इंसानो में भी ऐसा ही जज़्बा होता, एक बहुत प्रेरक कहानी जो मुझे मेरे भाई ने भेजी आप सबके साथ शेयर करने का मन हुआ *जब एक छिपकली कर सकती है, तो हम क्यों नहीं ?* [यह जापान में घटी, एक सच्ची घटना है ।] ➖ अपने घर का नवीनीकरण […]